योग से करो ऐसी भक्ति,
शरीर में प्राण फूंक जाते हैं।
आत्मा के संग मिले ऐसी उमंग,
तन-मन में ताजगी भर जाते हैं।
योग से करो ऐसी भक्ति,
कि शरीर के अंग शुद्ध हो जाते हैं।
तो फिर आत्मा से परमात्मा मिल जाते हैं,
जैसे अंधियारे में दीप जल जाते हैं।
जो कहते हैं हमें आज तक
परमात्मा नहीं मिले,
योग करके देखो शुद्ध मन से,
हर योग से हर रोग हरे,
उससे परमात्मा की झलक मिलती हैं।
योग से ही मिले हमें संतुलन,
मन की शांति और चित्त का नित कल्याण।
आत्मा की पवित्रता का हो आभास,
परमात्मा का हो साक्षात्कार, यही योग का विधान।
योग से जोड़ो ऐसी भक्ति,
कि हर सांस में दिव्यता समा जाए।
शरीर, मन और आत्मा का हो मिलन,
परम शांति और आनंद से जीवन भर जाए।