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वृष्टि

Journalist Akshay

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हवाओं में
        
                                                    
                            
मिट्टी के साथ आई
सौंधी खुशबू
सृष्टि पर वृष्टि
के आने का मानो
न्योता दे रही थी
वो हवाओ में आकर
आंधी तूफान मचा रही थी
फिर न जाने वृष्टि के
इंतजार में सुबह से शाम
ढलते गुजर रही थी
होता चला गया घना अँधेरा
वो बादलों के बीच की
आवाज बता रही थी
आसमानी बिजली
के चमकने की वो रात
अजीब थी लेकिन
इंतजार था वृष्टि का
वो आ ही गई थी
फिर हवाओ में
पेड़ो की आवाज
मानो कुछ कह रही थी
वह वृष्टि की अजीब रात थी।

अक्षय भंडारी,राजगढ़(धार)मप्र
निवासी : राजगढ़ जिला धार
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