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ऐसी हो मकर संक्रांति की क्रीड़ा

Journalist Akshay

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            परिंदों की पीड़ा मकर संक्रांति पर
        
                                                    
                            
पतंग संग डोर की मत करो क्रीड़ा
आसमान में पतंग संग डोर कि
हम परिंदों के लिये जानलेवा है यह क्रीड़ा
पतंग संग डोर उड़ती भले ही तुम
आसमान में अच्छी लगती हो
हम परिंदों की पीड़ा को भी समझो
उत्सव है न कि हिंसा फैलाने वाली क्रीड़ा

हम निकले कब यही बताओ
पतंग संग डोर इंसानो के लिये भी जानलेवा क्रीड़ा
परिंदे तो देख सकते है बोल नही सकते
लेकिन इंसान के हाथों इंसान से पतंग
ओर उसके संग चली डोर भले ही
वह मौन रहकर परिंदे व इंसान
के लिये भी अच्छी नही यह क्रीड़ा

मकर संक्रांति उत्सव पीड़ा देने का नही
बल्कि यह उत्सव में प्रेम की हो क्रीड़ा
अंधकार में प्रकाश हो न कि
पतंग के संग डोर से करवाओ ऐसी क्रीड़ा
अब तो समझो इंसान अपने ही हाथों
कैसे पापाचार की करते हो क्रीड़ा
देवता भी हो धरती पर अवतरित
ऐसी हो इंसानो ऐसी हो क्रीड़ा
मकर संक्रांति पर पतंग के डोर के संग
किसको कमजोर करने की नही होनी चाहिए
क्रीड़ा हो तो सब खुशहाल रहे
ऐसी हो मकर संक्रांति की क्रीड़ा

- अक्षय भंडारी, राजगढ़,तहसील सरदारपुर,जिला धार,मध्यप्रदेश।
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