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ज़िन्दगी ऐसे बिताई तो नहीं जा सकती (ग़ज़ल)

Johnny Ahmed

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज़िन्दगी ऐसे बिताई तो नहीं जा सकती
        
                                                    
                            
ग़ैर के साथ निभाई तो नहीं जा सकती

ख़ुद-ब-ख़ुद आग मोहब्बत की दहक उठती है
अपनी मर्ज़ी से लगाई तो नहीं जा सकती

अस्थियाँ ही तो बहा पाते हैं ये घरवालें
यादें गंगा में बहाई तो नहीं जा सकती

दिल की दीवार पे तस्वीर लगी है उसकी
और ये तस्वीर हटाई तो नहीं जा सकती

-जॉनी अहमद क़ैस
6 घंटे पहले
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