ज़िन्दगी ऐसे बिताई तो नहीं जा सकती
ग़ैर के साथ निभाई तो नहीं जा सकती
ख़ुद-ब-ख़ुद आग मोहब्बत की दहक उठती है
अपनी मर्ज़ी से लगाई तो नहीं जा सकती
अस्थियाँ ही तो बहा पाते हैं ये घरवालें
यादें गंगा में बहाई तो नहीं जा सकती
दिल की दीवार पे तस्वीर लगी है उसकी
और ये तस्वीर हटाई तो नहीं जा सकती
-जॉनी अहमद क़ैस
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