चलो मिलके नया रस्ता बनाते हैं मोहब्बत में
जो तुम चाहो, जो मैं सोचूँ, वो हो जाए हक़ीक़त में
तुम अपना दुःख कहो मुझसे, मैं अपना ग़म तुम्हें बोलूँ
मुझे तुम और तुमको मैं ही याद आऊँ मुसीबत में
-जॉनी अहमद 'क़ैस'