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महापुरुषों का नाम भुना लिया है

Jitender Kabir

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            महापुरुषों का नाम भुना लिया है
        
                                                    
                            

वक्त गुजरने के साथ
सच्ची, सरल शिक्षाओं को
रूढ़ करके सदियों के लिए
जटिल हमनें बना लिया है,

महापुरुषों के
सच्चे उपदेशों को
अपने स्वार्थ में अंधे हो कर
अब हमनें भुला दिया है,

याद करते हैं सब उन्हें
चतुर बनकर
लोगों को अपने पक्ष में
गोलबंद करने के लिए केवल,
जनहित का उनका आह्वान
किनारे हमने लगा दिया है,

सब महापुरुषों ने उपदेश दिए
प्रेम, शांति और भाईचारे के,
उनको अघोषित तौर पर हमने
गुनाह एक ठहरा दिया है,

विरोध मूर्ति पूजा का किया
जिन महापुरुषों ने,
मूर्तियां उनकी ही बनाकर
भगवान उन्हें बना दिया है,
जाति-धर्म का खंडन करने
वालों पर भी
किसी विशेष जाति-धर्म का
लेबल हमने चिपका दिया है,

अपनी जिंदगी में उनके
अच्छे विचारों पर चलते नहीं,
बस अपने स्वार्थ के लिए
जहां जहां हो सकता है वहां
उनका नाम हमने भुना लिया है।

लड़ते हैं अब अपनी जाति और
धर्म के महापुरुष के नाम पर
आपस में सब,
इंसानियत बचाने वालों को ही
इंसानियत खत्म करने का
हथियार हमने बना लिया है।

जितेन्द्र 'कबीर'
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