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अगहन का शरद मौसम

Jhilmil Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अगहन का शरद मौसम
        
                                                    
                            
सबके सर पे चढ़ा है।
कोहरे संग आँख मिचोली
खेल रही उषा है ।

अंबर शीत को बरसाये
सन-सन शीतल बहती हवा है।
हाथ-पैर काँपते ठंड से
मुँह से निकलता धुआं हैं।

बाग-बगीचे में हरियाली छाई
ओस की बूंदे मोती जैसे
क्षितिज पे दिख रहा है।
सरसों के फूलों से
बढ़ रही खेतों की शोभा है।

चाचा कि चाय दुकान में
अब भीड़ बढ़ गई है।
तारीफें सुन चाय की
चाचा कि नाक आकाश पे चढ़ी है।

दोपहरी की धूप सुहानी
सब चखने को छत पर जाते हैं।
रंग-बिरंगे पतंगों से
सज रहा आसमां हैं।

सब तन को ढकते दुशाला से
आग की गर्मी में हाथो को सहलाते हैं।
रजाई के आगोश में सबकी
बीत रही निशा है।

-झिलमिल यादव
गिरिडीह (झारखण्ड )

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