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गजल - "मुलाकात"

Jayshankar Singh Baghel

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गजल - "मुलाकात"
        
                                                    
                            

तुमने हमें कहा था, मिलने जभी हम आयें।
आँखों में आँखें डाल के, सपने यूँ कुछ सजायें।

कुछ प्यार से तू बोले, कुछ प्यार से मैं बोलूँ,,,,
कुछ थाम के दिल थोड़ा , फिर हाल -ए -दिल बतायें।।

फिर हाथ थाम करके, जैसे मैं चूमूं माथा,
शरमा के थोड़ा सा फिर, तू नज़रों को झुकाये।

धड़कन धड़कती धक धक, फिर साँस फूलती यूँ,,,,
धड़कन को एक करके, सरगम सा लय बनायें।।

तो अब बता दे सजना, कैसी थी मुलाकातें,,,,
क्या क्या किया फिर वादा, और कौन कसम खायें।

इस प्यारी याद से फिर, "जय" ने गजल पिरोई,,,
जिसको मैं गुनगुनाऊँ, कुछ तू भी गुनगुनाये।

दिल से..............जयशंकर सिंह बाघेल
("बस इतना-सा ख्वाब")
10 घंटे पहले
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