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इश्क की ऑधी आयी है

Jaykishan Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इश्क की ऑधी आयी है
        
                                                    
                            
सब उडा के लायी है
रेत रेत सब हो गया
आसमान अब खो गया
छिपी हुई है जनता
कुछ नहीं है बनता
धूल जमी है पत्तों पर
कोई नहीं है सड़कों पर
कच्चे आम भी गिर गये हैं
पेड सरी के टूट गये हैं
पंछी प्यासे बैठे हैं
ना जागे हैं
ना सोते हैं
भूख प्यास अब ना रही
ऑधी धू धू गा रही।
तूफान बनी है ऑधी तो
हुई है अब बरबादी तो
इश्क की ऑधी आयी है
सब उडा के लायी है
रेत रेत सब हो गया
आसमान अब खो गया
2 घंटे पहले
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Updesh Kumar

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