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इस राज्य का सूरज है तू

Jaykishan Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस राज्य का सूरज है तू
        
                                                    
                            
इस प्रजा का धीरज है तू
ना त्याग राज काज को
ना त्याग प्रजा प्यार को
स्नेह का दीपक है तू
इस राज्य का शीर्षक है तू
अत्याचार है तो मिटवा दे
प्यार है तो बढवा दे
मुँह ना फेर इस जिम्मेदारी
के बोझ से
ना हो ढेर तू गोरों के रोग से
न्याय का रंग चढा ले
अपने चेहरे पे
अपना ही ढंग दिखा दे
राज्य के पहरे पे
राज मुकुट को पहनकर
राज्य सभा को जोडकर
अब गरज उठ तू
अत्याचार पे
अब बरस उठ तू
प्रजा प्यार पे
इस राज्य की नदियों
का नीरज है तू
इस राज्य का सूरज है तू
इस प्रजा का धीरज है तू
7 घंटे पहले
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