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जले ताकि चूल्हा उस अकिंचन का

Jayalakshmi Ajith

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कविता : फूलवाली
        
                                                    
                            

नन्हा शिशु अंक में,
हाथ में पुष्पों की टोकरी,
टोकरी में पुष्प की माला
प्रभु के अर्पण को,
खरीदे जो अपनी मन्नत में ।

देवालय में भगवान
निहार रहे हैं भक्तों को,
निज कामना की पूर्ति हेतु
खरीदें जो नित,
उन कुसुम मालाओं को ,
जले ताकि चूल्हा उस अकिंचन का ll
एक दिन पहले
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