कविता : फूलवाली
नन्हा शिशु अंक में,
हाथ में पुष्पों की टोकरी,
टोकरी में पुष्प की माला
प्रभु के अर्पण को,
खरीदे जो अपनी मन्नत में ।
देवालय में भगवान
निहार रहे हैं भक्तों को,
निज कामना की पूर्ति हेतु
खरीदें जो नित,
उन कुसुम मालाओं को ,
जले ताकि चूल्हा उस अकिंचन का ll
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