आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जले ताकि चूल्हा उस अकिंचन का

                
                                                         
                            कविता : फूलवाली
                                                                 
                            

नन्हा शिशु अंक में,
हाथ में पुष्पों की टोकरी,
टोकरी में पुष्प की माला
प्रभु के अर्पण को,
खरीदे जो अपनी मन्नत में ।

देवालय में भगवान
निहार रहे हैं भक्तों को,
निज कामना की पूर्ति हेतु
खरीदें जो नित,
उन कुसुम मालाओं को ,
जले ताकि चूल्हा उस अकिंचन का ll
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक दिन पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर