विज्ञापन

कविता: नहीं हारना

Jayalakshmi Ajith

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कविता: नहीं हारना
        
                                                    
                            

रात भर की बरसात से,
से हुआ हर क्षेत्र नम ।

मिट्टी जब गीली हुई,
रास्ते बने दुर्गम ।

हर डगर पर संभलकर ,
जो गिरकर फिर उठे ।

पंक को हराकर मानव,
फिसलन से भी जीते ।।

 
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile