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कविता:गणपति

Jayalakshmi Ajith

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सीख दी तुमने महा गणपति,
        
                                                    
                            
माता- पिता ही हैं जगत,
यही परिक्रमा की नीति ।

धार्मिक बोध की पावन चाहत,
तुम ही हो विघ्नेश्वर,
तुम ही हो पूर्णता की मूरत ।

ज्ञान धारक, मूषक वाहक,
ऊँच-नीच के तुम भंजक।

दर्प मिटाकर मोदक सम बाँटे समता,
हरती जग की सारी विकलता ।
10 घंटे पहले
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