नारियल के वृक्षों से सजी यह देवभूमि,
कल-कल करती बहती यह हरित भूमि ।
स्थापित हुआ बनकर केरल राज्य,
एक नवंबर को गढ़ा गया नव स्वराज्य।
देवभूमि पर जो कभी था राजशासन,
इतिहास साक्षी में बना वहाँ लोकशासन।
समता भाव की दृष्टि उनके अतुल्य कर्म,
सर्व धर्म का मान रखना ही अपना धर्म।
केरल राज्य की महान विभूति सदा बढ़ती रहे,
गुणगान के ये स्वर सदियों तक यूँ ही गूँजते रहे ll
-जया लक्ष्मी अजितन,