साज सज्जा से सज्जित तोरण,
अभ्यागत-स्वागत में मुक्तामाला ।
और बन हार गले का,
प्रशंसा सबकी पाता,
मोती को था नाज स्वयं पर,
मंद- मंद मुस्काता,
पतित जमीन पर बिखरे मोती,
बटोरे सब रखा डिब्बे में,
सुला दिया मृत्यु शैया पर ॥