आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कविता: मोती

                
                                                         
                            साज सज्जा से सज्जित तोरण,
                                                                 
                            
अभ्यागत-स्वागत में मुक्तामाला ।
और बन हार गले का,
प्रशंसा सबकी पाता,
मोती को था नाज स्वयं पर,
मंद- मंद मुस्काता,
पतित जमीन पर बिखरे मोती,
बटोरे सब रखा डिब्बे में,
सुला दिया मृत्यु शैया पर ॥
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
16 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर