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शायरी

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उन्होंने हमसे बात क्या कर ली हम तो उड़ने लगे थे।
        
                                                    
                            
उन्होंने मेरा हाथ नही थामा फ़िर भी हम संभलने लगे थे।
यार मैं ही था उनकी मोह्बब्त में पागल
जो उनकी नफरत को मोहब्बत  समझने लगा था




की आँखों में एक कफ़न है।
इसमें हर एक दर्द दफ़न है
प्यारे दिया जिसने धोखा
वहीं  बेवफा सनम हैं।।।।।।


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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