माला देखकर लोग कहें, ये कैसा काम है,
नई पीढ़ी समझे इसे बस पूजा का नाम है।
पर इस छोटे से जप में शक्ति बड़ी अपार है,
बड़े-बड़े ज्ञानी भी करते इस पर विचार है।।
जब एक ही नाम को लय से गाते हैं,
मन के बिखरे तार उसी में बंध जाते हैं।
दिन भर की चिंता से मन भारी रहता है,
जप से वही मन हल्का-फुल्का बहता है।।
जप का मतलब है जो मन को तार दे,
उलझनों के बंधन से जो पार उतार दे।
एक ही धुन जब दिल में गूँजने लगती है,
नस-नस में मीठी सी शांति बजने लगती है।।
मन में एक कोना है डर का घर जैसा,
जरा-जरा बात पर जो बजता अलार्म जैसा।
जप की थाप पड़े तो वो डर सो जाता है,
जैसे माँ की लोरी सुन बच्चा सो जाता है।।
जीभ तालू से मिले तो नाड़ी जागती है,
गले की कंपन से शांति भीतर भागती है।
तनाव घट जाता है, दिल धीमा धड़कता है,
जप से सारा तन-मन शीतल हो पड़ता है।।
ये सिर्फ भगवान को मनाना नहीं है,
ये खुद को भीतर से शांत बनाना नहीं है।
ये तो मन की मैल को धोने जैसा है,
अंधेरे मन में दीया जलाने जैसा है।।
जन्मों-जन्मों का जो कचरा जमा पड़ा है,
नाम की आँधी से वो सारा उड़ा पड़ा है।
मन जब साफ हो तो ईश्वर दिख जाता है,
विज्ञान जहाँ रुके, भजन वहीं से गाता है।।
इसलिए जप को बेकार न समझो भाई,
ये तो दुखी मन की सबसे बड़ी दवाई।
बाहर ढूंढोगे तो भटकोगे संसार में,
शांति तो बसी है बस एक ही पुकार में।।
- जगदीश प्रसाद शर्मा