"मैं से बेहतर मैं"
जीवन दौड़ नहीं, आगे निकलने की,
यह यात्रा है, खुद को निखारने की।
हर किसी की राह, अलग ही होती,
हर किसी की गति, अलग ही होती।
किसी की नकल से, छोटा मत बनो,
किसी से जीत कर, झूठा मत तनो।
तुलना से मन, अशांत होता है,
आत्ममंथन से मन, प्रशांत होता है।
प्रतिस्पर्धा जन्म दे, अहंकार को,
आत्म-सुधार गढ़े, साकार को।
होड़ लगानी है तो, कल से लगाओ,
कल के 'मैं' को, आज से हराओ।
कल जहाँ मन में, असमंजस था भारी,
आज वहाँ लाओ, स्पष्टता प्यारी।
कल जिस बात ने, तुम्हें विचलाया था,
आज उसी से तुमने, धीरज पाया था।
आज एक छोटा सा, संकल्प लो,
कल से बेहतर, खुद को बना लो।
मेरे विचार हों, और सकारात्मक,
मेरा कर्म हो, थोड़ा परोपकारात्मक।
मेरे व्यवहार से, रोशनी जुड़ जाए,
किसी के अंधेरे में, दिया जल जाए।
कल से बेहतर आज, आज से बेहतर कल,
यही साधना हो, यही हो हल।
न किसी से आगे, न किसी से पीछे,
बस अपने ही भीतर, हम रोज़ सींचें।
जो खुद से जीते, वही सिकंदर है,
आत्म-सुधार ही, सच्चा अंदर है।
- जगदीश प्रसाद शर्मा