"एक चिट्ठी भारत माँ के नाम"
पूज्य भारत माँ, तुझे वंदन, तुझे अभिनंदन,
तेरी गोद में पलता हर कण, तेरा ही अभिनंदन।
आज तेरे आँगन में ऊर्जा की नई लहर चली,
आशा की किरणें कोने-कोने तक पल-पल ढलीं।
मोदी-योगी जैसे सपूत तुझे मिले उपहार,
जीवन जिनका अर्पित है, बस तेरी सेवा में बारम्बार।
न अपना घर, न अपना स्वार्थ, न निज का कोई मान,
"भारत माँ" के नाम किया, तन-मन-धन कुर्बान।
पर माँ, इतिहास के पन्ने भी याद आते हैं,
कुछ काले अध्याय दिल को दुखाते हैं।
संविधान से खेल कर सनातन को छेड़ा गया,
तुष्टिकरण की नीति से तेरा मान घटाया गया।
तेरी संपदा लूटी, तेरी पहचान मिटी,
स्वार्थ की आँधियों में कई पीढ़ियाँ सिमटीं।
आज भी माँ, कुछ आँखें प्रगति को नहीं देखतीं,
विदेशी इशारों पर आंदोलन की आग सेंकतीं।
जोड़ने की जगह बाँटने का खेल रचाती हैं,
तेरे ही नाम पर तुझे ही लहूलुहान करती हैं।
माँ, जब तोड़ने को आपातकाल थोपा जा सका,
तो जोड़ने को कठोर निर्णय क्यों न लिया जा सका?
राष्ट्रविरोधी जंजीरें जब तोड़ी जा सकती हैं,
तो भारत को सशक्त करने की नींव क्यों न रखी जा सकती है?
इसलिए हे माँ, तेरे सपूतों से एक विनती है,
दूरदर्शी, साहसिक कदमों की अब अग्नि परी है।
ऐसे फैसले लो जो सदियों तक गूंजे,
भारत शीश उठाए, विश्व में मान से पूजे।
वंदे मातरम्, जय हो तेरी जयकार,
तेरे चरणों में शीश झुका, बारम्बार।
जय हिंद, जय भारत माँ 🇮🇳
- जगदीश प्रसाद शर्मा