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लेकिन यह प्यार भी तो यहां

jagdish bhandari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कच्चे धागों से बंधा प्रेम का,
        
                                                    
                            
भाई-बहन का अटूट ये बंधन।
सावन मास में आता है यह,
पवित्र त्यौहार है रक्षाबंधन।

इस दिन थाल सजाकर बहना,
भाई को अपने तिलक लगाए।
कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर,
उसका वह मुंह मीठा कराए।

रक्षाबंधन के पावन पर्व पर,
बहना भगवान से दुआ करे।
जिए हजारों साल भैया मेरा,
उसको किसी की नजर ना लगे।

भाई भी बहना को उस दिन,
स्वेच्छा से उपहार है देता।
जीवन के हर मोड़ पर उसको,
साथ निभाने का वचन है देता।

रंग-बिरंगी राखियों से इस दिन,
बाजार की दुकानें सज जातीं।
चारों तरफ खुशियों की रंगत,
हर एक दिल को है हर्षाती।

सदियों से रक्षाबंधन का त्योहार,
मनाने की परंपरा चली आई।
संकट में तब श्री कृष्ण ने भी,
द्रौपदी की थी लाज बचाई।

लेकिन यह प्यार भी तो यहां,
हर किसी के नसीब में कहां।
खुशनसीब हैं वो भाई-बहनें,
जिन्हें मिलता यह प्यार यहां।
 
एक महीने पहले
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