विज्ञापन

खो जाता हूं रातों को फिर से मैं उन्हीं ख्यालों में

Ismita Khanna

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यूं तो मैं भी हंस लेता हूं दिन के नए उजालों में
        
                                                    
                            
खो जाता हूं रातों को फिर से मैं उन्हें ख्यालों में
मेरा भी हो अंदाज नया आवाज नई आगाज नया
इतिहास में मेरा नाम आए जीवन मेरा किसी काम आए
मैं सोच रहा था बैठे-बैठे क्यों थक जाता हूं मैं ऐसे
ठान अगर मैं लेता हूं , हर मुश्किल हल कर देता हूं
फिर भी क्यों उलझा बैठा हूं अपने ही चंद सवालों में
यूं तो मैं भी हंस लेता हूं दिन के नए उजालों में
खो जाता हूं रातों को फिर से मैं उन्हें ख्यालों में
6 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Pandey

419 कविताएं

View Profile