विज्ञापन

आत्मनिर्भर भारत का संकल्प

Islam Ali

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चलो बनाएं एक कहानी,अपने हाथों की पहचान,
        
                                                    
                            
जहाँ हर घर में गूँजे फिर से,स्वदेशी का गर्वित गान।

न हो पराया मोह हमें, न हो विदेशी का लोभ,
जो रचा हो भारत में, वही हो अनुरागी शौक।

"Vocal for Local" नारा नहीं,देश की पुकार है,
हर मिट्टी के कण में छिपी, स्वाभिमान की धार है।

जो हो स्वदेशी, सिर्फ़ उसी को अपनाओ,
देश के श्रम की महिमा को,सम्मान से सर झुकाओ।

पसीना जो बहा कारीगर का,उसमें तप है,तपस्या है,
हर उत्पाद में मेहनत की,भक्ति भरी भव्यता है।

कपड़े हों या खिलौने, बर्तन हों या लेखन-पुस्तक,
हर चीज़ में हो भारतीयता,यही हो अब युग-प्रवृत्त।

न खरीदें विदेशी उत्पाद,अपनों को क्यों भूले हम?
अपने देशी कारीगरों का हक़ न छीनें हम।

2047 का भारत तभी होगा,सशक्त,समर्थ,महान,
जब लोकल को मिलेगा ग्लोबल का पूरा सम्मान।

चलो मिलकर प्रण लें,आत्मनिर्भरता को अपनाएं,
हर गाँव,हर शहर में Make in India को सजाएं।

विकसित भारत का सपना,तभी साकार हो पाएगा,
जब हर भारतीय,Vocal for Local गुनगुनाएगा।
एक वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7108 कविताएं

View Profile