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"तोहीन् - ऐ - इश्क़"

Ishmeet Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तेरा अक्स देखकर मुस्कुरा उठती है रूह भी मेरी,
        
                                                    
                            
जैसे सूरज कि रौशनी में खिली कोई कली नवीन होती है,

कुछ जज़्बात् निगाहों से पड़ लिए जाते हैं जनाब
हर अल्फाज़् कहकर बताना "जज़्बात् - ऐ - इश्क़" की तोहीन् होती है।
एक महीने पहले
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