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"तोहीन् - ऐ - इश्क़"

                
                                                         
                            तेरा अक्स देखकर मुस्कुरा उठती है रूह भी मेरी,
                                                                 
                            
जैसे सूरज कि रौशनी में खिली कोई कली नवीन होती है,

कुछ जज़्बात् निगाहों से पड़ लिए जाते हैं जनाब
हर अल्फाज़् कहकर बताना "जज़्बात् - ऐ - इश्क़" की तोहीन् होती है।
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2 घंटे पहले

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