तुम्हारी ज़ुल्फ़ को घटाओं का बदल लिखूंगा।
तुम्हारे फूल से गालों को कमल लिखूंगा।
ये जो कुदरत ने तराशा है तसल्ली से तुझे।
मैं तुझे जीता हुआ ताजमहल लिखूंगा।
तू सर से पैर तक चलती हुई क़यामत है।
तेरे शबाब पर मैं कोई ग़ज़ल लिखूंगा।
जो तुझको देखकर महसूस मुझको होता है।
इसकी तफ़सीर तो मैं आज या कल लिखूंगा।
अगर लिखना हो "मेंहदी" को मुक़द्दर अपना।
तुझे नसीब में मैं अपने बगल लिखूंगा।।