कसम तुम प्यार कि खाओ कि मज़ा आ जाए।
कोई नग़मा ही सुनाओ कि मज़ा आ जाए ।।
न कोई हो, न किसी आने की उम्मीद ही हो ।
ऐसी तन्हाई में आओ कि मज़ा आ जाए।।
दिल का बात जुबां से तुम जारी कर दो ।
राज़ ऐसा तुम बताओं कि मज़ा आ जाए।।
राज़ कहते हुए जो तुमको लाज आ जाए ।
मेरी बाहों में सिमट जाओ कि मज़ा आ जाए ।।
लग के सीने से सभी दूरियां खतम कर दो ।
लबों से लब यू लगाओ कि मज़ा आ जाए।।
ना हम काबू में रहें और न सांसे अपनी ।
साथ ऐसा तुम निभाओ कि मज़ा आ जाए।।
न दूर खिसके और न ही करवटें बदलें।
साथ अपने यूं सुलाओ कि मज़ा आ जाए।।
न अलग हो कभी उससे ये खुशबू तेरी ।
तुम यूं "मेंहदी" में समाओ कि मज़ा आ जाए।।