विज्ञापन

शृंगार का शृंगार

Ipsita Bhadauria

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रूप है शृंगार का , ममतामयी अवतार का
        
                                                    
                            
प्रतिबिम्ब है वो प्यार का , सौहार्द का , कल्याण का ।।
है बहुत कुछ पर मगर , इतना अभी तुम जान लो ,
ऐसे किसी को न मिले , मिलती बस अनुराग से
शृंगार स्त्री से सजे , वो न सजे शृंगार से ।।
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile