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विष का तोड़ बनाने को , विषधर ही पाले जाते हैं।

Ipsita Bhadauria

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बचना चाहे कितना भी हम , क्या सच मे बच पाते है
        
                                                    
                            
बाग लगाने वाले ही , फूल चुराने आते हैं।
दंभ भरू कितना भी मैं, मेरे जैसे प्रतिदिन आते जाते हैं।
हम कुछ-कुछ पाने की खातिर, कितना कुछ खो जाते हैं।
मुझको मैं बनाने को कुछ लोग बहुत जरूरी हैं।
विष का तोड़ बनाने को , विषधर ही पाले जाते हैं।
14 घंटे पहले
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