विज्ञापन

जुगनुओं की बारातों से , सवेरे नहीं हुआ करते ।

Ipsita Bhadauria

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हों कितने भी हम अकेले , अकेले नहीं हुआ करते ।
        
                                                    
                            
पलकें झपका लेने से , अंधेरे नहीं हुआ करते ।
ब्रह्मांड जगाने की खातिर, एक सूरज काफी है ,
जुगनुओं की बारातों से , सवेरे नहीं हुआ करते ।
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3563 कविताएं

View Profile