हों कितने भी हम अकेले , अकेले नहीं हुआ करते ।
पलकें झपका लेने से , अंधेरे नहीं हुआ करते ।
ब्रह्मांड जगाने की खातिर, एक सूरज काफी है ,
जुगनुओं की बारातों से , सवेरे नहीं हुआ करते ।
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