हमारे गुनाहों कोअपने आँचल में छुपाती है माँ।
किसी की बुरी नजर ना लगे इसलिए बुरी नज़र से बचाती है माँ।
अपना भुखी भले सो जाये लेकिन
अपने हिस्से का भोजन खिलाती है माँ।
- इन्दू यादव