मातृभूमि को स्वतंत्रता दिलाने में अनेकों वीरों ने लुटाए प्राण तन मन धन हैं।
ऐसे ही नहीं खुली हवा में साँस ले रहे हैं इस हेतु सुख उन्होंने किए हवन हैं।
घर बार माता पिता भाई व बहन तक, को हैं छोड़े बस याद रक्खे वो वतन हैं।
उनको सच्ची श्रद्धांजली के हेतु हम सब, उन्हें याद कर कोटि करते नमन हैं।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'