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खुरपेंच

Indra Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बात भली भल लोग कहैं तबहूँ कसिकै जिय माहिं विचारें।
        
                                                    
                            
लोग जहाँ खुरपेंच करैं उनके ढिंग मा पल नाहिं गुजारें।
मीत भले कम होंय मुला पर होंय वही नित काम सँवारें।
जाव सदा उनके घर ही हिय प्रेम सुधा रखि राह निहारें।
-इन्द्र प्रसाद लोधी 'रत्नेश'
7 घंटे पहले
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