बात भली भल लोग कहैं तबहूँ कसिकै जिय माहिं विचारें।
लोग जहाँ खुरपेंच करैं उनके ढिंग मा पल नाहिं गुजारें।
मीत भले कम होंय मुला पर होंय वही नित काम सँवारें।
जाव सदा उनके घर ही हिय प्रेम सुधा रखि राह निहारें।
-इन्द्र प्रसाद लोधी 'रत्नेश'
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