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ज्योति जले मन मंदिर में

Indra Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज्योति जले मन मंदिर में नित ध्यान तुमारहि अंब करूँ।
        
                                                    
                            
प्रेम बसे हिय माहिं निरंतर औरन के मन प्रेम भरूँ।
देख सकूँ न दुखी जन को उनके हित में नित मैं विचरूँ।
दो वर माँ मुझको यह ही यदि काल लड़े तब भी न डरूँ।
-इन्द्र प्रसाद लोधी 'रत्नेश'
3 घंटे पहले
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