पावन माह हवै शिव का मन झूमत और तरंगहि गावै।
शंकर शंकर हे शिव शंकर नाम रटै पल नाहिं भुलावै।
लै जल भाँग धतूरन को शिव लिंग चढ़ावन ही मन भावै।
एकहि भाव उठै मन में हर माह प्रभो यहु सावन आवै।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'