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भटका मेघा

Indira Kumari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भटक गये तुम मेघा
        
                                                    
                            
बगिया तुम्हें बुला रही
सूख रहे हैं ताल तलैया
नदियां तुम्हें बुला रही।

रूठ कर भंवरे चले गये
कलियाँ तुझे बुला रही
पात पात अब गिर चुके
डालियां तुझे बुला रही।

धान फसल अब लगे कैसे
पनीरियां तुझे बुला रही
जल बिनु तड़पे कछुआ मेढक
मछलियाँ तुझे बुला रही।

प्रकृति हो गई व्याकुल तेरे बिन
गलियां तुझे बुला रही
आ रे मेघा जल बरसा तू
दुनिया तुझे बुला रही।
3 महीने पहले
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