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भटका मेघा

                
                                                         
                            भटक गये तुम मेघा
                                                                 
                            
बगिया तुम्हें बुला रही
सूख रहे हैं ताल तलैया
नदियां तुम्हें बुला रही।

रूठ कर भंवरे चले गये
कलियाँ तुझे बुला रही
पात पात अब गिर चुके
डालियां तुझे बुला रही।

धान फसल अब लगे कैसे
पनीरियां तुझे बुला रही
जल बिनु तड़पे कछुआ मेढक
मछलियाँ तुझे बुला रही।

प्रकृति हो गई व्याकुल तेरे बिन
गलियां तुझे बुला रही
आ रे मेघा जल बरसा तू
दुनिया तुझे बुला रही।
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3 महीने पहले

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