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परेशान है हिंदी अपने ही घर में

ij singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            परेशान है हिंदी अपने ही घर में
        
                                                    
                            
चाहकर भी सो नहीं पाती चैन से
अंग्रेजी की अकड़ कुछ बड़ सी गई है
घर घर में अंगद सा पांव जमाती ठाठ से

हिंदी के हर शब्द में बसती है तहज़ीब
अंग्रेजी में यू से ही सब सिमट गया
आप तुम तू के भाव हैं अलग अलग
पर वहाँ हर रिश्ता जैसे सिमट गया

हिंदी है हमारे अंतर्मन की भाषा
पर अपनो के व्यवहार से ही आहत है
ठगी सी लगती है अपनी ही पहचान
कोई जैसे अपनेपन से वंचित है

दोष नहीं है नन्हें मुन्नों का इसमें
माता पिता की भी है कुछ मजबूरी
परिवेश ही कुछ ऐसा बन गया है
जहां अंग्रेजी की गहरी धूरी है

अंग्रेजी का मायाजाल फैला ऐसा
हर कोई उसमें उलझता जा रहा है
हृदय में अब दोनो का घर तो है
पर संतुलन कहीं खोता जा रहा है

विदेशी सीख रहें हैं हिंदी को
हम अंग्रेजी की ग्रामर रट रहे है
अपनी ही जड़ो से दूर होते होते
खुद को ही जैसे खोते जा रहे हैं
-रियो
3 महीने पहले
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