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मुड़ कर तो देखो

ij singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दूर कही झुरमुट के पीछे
        
                                                    
                            
जाने कब से खड़ी हो तुम
एक बार मुड़ कर तो देखो
परछाई बन पीछे खड़ा तुम्हारे मैं

उगता सूरज ढ़लता सूरज
चांद भी जब छुप जाता
स्नै स्नै मैं धड़कन बन
सांसो में तुम्हारी बस जाता

अफसोस नहीं दूरी का मुझको
आस पास तुमको पाता
भले न बोलो शब्द कोई तुम
भले ही तुम यू ही छिपी रहो

परछाई बन पीछे खड़ा तुम्हारे मैं
एक बार मुड़ कर तो देखो
एक बार मुड़ कर तो देखो
-रियो
2 महीने पहले
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