दूर कही झुरमुट के पीछे
जाने कब से खड़ी हो तुम
एक बार मुड़ कर तो देखो
परछाई बन पीछे खड़ा तुम्हारे मैं
उगता सूरज ढ़लता सूरज
चांद भी जब छुप जाता
स्नै स्नै मैं धड़कन बन
सांसो में तुम्हारी बस जाता
अफसोस नहीं दूरी का मुझको
आस पास तुमको पाता
भले न बोलो शब्द कोई तुम
भले ही तुम यू ही छिपी रहो
परछाई बन पीछे खड़ा तुम्हारे मैं
एक बार मुड़ कर तो देखो
एक बार मुड़ कर तो देखो
-रियो
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