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फकीर की फकीरी

ij singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            फकीर की फकीरी में जो मजा है
        
                                                    
                            
अमीर की अमीरी में कहां
चैन छिन जाता है नींद उड़ जाती है
दौलत की राह में उम्र रो जाती है
जनाज़ा एक दिन उठता है सबका
कोई ऐसा कहां रुखसत न हुआ हो जो


 
2 महीने पहले
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