फकीर की फकीरी में जो मजा है
अमीर की अमीरी में कहां
चैन छिन जाता है नींद उड़ जाती है
दौलत की राह में उम्र रो जाती है
जनाज़ा एक दिन उठता है सबका
कोई ऐसा कहां रुखसत न हुआ हो जो
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