वक्त ने करवट बदली है अभी-अभी,
ख़्वाबों ने आँखें मली हैं अभी-अभी।
राहों ने मोड़ बदल लिया यूँ ही,
मंज़िलें भी जैसे चली हैं अभी-अभी।
दिल ने किसी पर यकीन कर लिया,
धड़कनों ने बात कही है अभी-अभी।
चाँद से बातें करने निकले थे हम,
पर रात कुछ और हुई है अभी-अभी।
जो साथ चलने का वादा करते थे,
वो राहें भी जुदा हुई हैं अभी-अभी।
मुस्कुराने की कोशिश की थी हमने,
आँखें फिर भी भीग गई हैं अभी-अभी।
- हुकम राजपुरोहित