तू मेरे आगे आया,
भीगी पलकों में एक अधूरी सी ख्वाहिश लेकर,
और कहा—
"भगवान, बस ये दे दे… मेरे लिए यही सब कुछ है।"
मैं चुप रहा…
क्योंकि मैं जानता था —
तू जिसे सब कुछ समझ रहा है,
वो तेरे लिए कुछ भी नहीं था।
तू टूटा, तू रोया, तू मुझसे नाराज़ भी हुआ,
पर तू ये नहीं जानता —
मैंने तुझसे कुछ छीना नहीं,
मैंने तुझे संभाला है, चुपचाप… बिना शोर किए।
जिस राह पर तू जाना चाहता था,
वहाँ अंधेरे थे, गिरने की आवाज़ें थीं,
और तू चाहता था कि मैं तुझे वहाँ पहुँचा दूँ?
नहीं मेरे बच्चे…
मैं तुझे वहां नहीं जाने दूँगा
जहाँ तुझे तेरा दर्द भी समझ में ना आए।
तेरे सवाल थे —
"क्यों नहीं दिया तूने?"
"मैंने तो सच्चे दिल से मांगा था!"
हाँ, तेरा दिल सच्चा था,
पर जो मांग रहा था, वो तेरे लिए सही नहीं था।
तू बस आज देख पा रहा है,
मैं तेरा कल, परसों, और आने वाला जीवन देख रहा हूँ।
तू बस चाहत देखता है,
मैं तेरे लिए सुकून ढूँढ़ता हूँ।
जो तुझसे दूर गया,
वो तेरा नहीं था —
और जो तेरा है,
वो कभी तुझसे दूर नहीं जाएगा।
आज तू जिस चीज़ के लिए रो रहा है,
कल तू उसी के लिए शुक्रिया कहेगा।
और तब तुझे मेरी ये चुप्पी समझ आएगी।
मैं हर दुआ सुनता हूँ,
पर हर दुआ पूरी नहीं करता —
क्योंकि मैं तेरी ज़रूरतें पूरी करता हूँ,
तेरी ज़िद नहीं।
तो जब अगली बार कुछ ना मिले,
तो रो लेना... मैं पास ही हूँ,
पर ये मत सोचना कि मैं सुनता नहीं।
मैं सुनता हूँ —
पर मैं सिर्फ वही देता हूँ
जो तुझे टूटने नहीं,
संवरने में मदद करे।
कुछ चीज़ें मिलना नेमत होती हैं,
और कुछ चीज़ें ना मिलना - रहमत।