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लौ इस पय की हर और जलती रहेगी।

Hitendra Pal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस पायस में पय है, इसे तुम पिया करो तथागत,
        
                                                    
                            
इसे यहां हर रोज बनाया जाता है,
हर व्यक्ति को यहां संबोधन तथागत से,
तो उसका संबंध पायस से भी जोड़ा जाता है,
पय के विलोपन से ये संसार क्षुब्ध हो गया,
पय विहीन बुद्धि से यहां सबकुछ मिट गया,
पर जब यहां से निकल ये इस संसार में जायेंगे,
तो हर तरफ बस तथागत ही तथागत दिखेंगे,
क्षुब्ध संसार की क्षुब्धता फिर कभी नहीं रहेगी,
लौ इस पय की हर और जलती रहेगी।
एक घंटा पहले
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