शानदार प्रदर्शन
कर रहीं से मातृभाषा पोवारी।
समाज मा नवचेतना,
जगाय रही से मातृभाषा पोवारी।।
अमर उजाला मा प्रतिदिन
प्रकाशित होय रही से पोवारी।
आपली रंग छटाएं ,
बिखेर रही से मातृभाषा पोवारी।।
हिन्दी साहित्य को आंगन मा
प्रतिदिन प्रकाशित होय रही से पोवारी।
विद्वान साहित्यिकों की,
प्रशंसा पाय रही से मातृभाषा पोवारी।।
शब्दों की आत्मा मा
हरियाणा लक प्रकाशित होय रही से पोवारी।
राष्ट्रीय पत्रिका मा,
प्रशंसा की पात्र बन गयी से मातृभाषा पोवारी।।
समाज को जन- जन ला
प्रोत्साहित कर रही से मातृभाषा पोवारी।
स्वजनों को हर दिल मा,
नवी उमंग संचारित कर रही भाषा पोवारी।।
रेशमा, निकिता कन्याओं की
कला लक प्रचारित होय रही से पोवारी।
प्रगति, पायल बेटियों की,
कला लक सबला भाय रही से पोवारी।।
पोवारी साहित्यिकों की
लेखनी लक प्रकाशमान होय रहीं से पोवारी।
पोवारी कलाकारों की,
कला लक उजाड़ों मा आय रहीं से पोवारी।।
--ओ सी पटले